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एक नए ज़माने की अधूरी कहानी यह कहते हुए की यह कौन-सी कहानी है, और इसका नाम किस प्रकार से रखा गया, क्या इसके पीछे की  कहानी है।  क्योकि बहुत लोग हैं जो संवेदनशील हैं, भावुक हैं दुसरो के प्रति, ईमानदार हैं और अंदर से जोश भी भरा हुआ है की कुछ करें पर अपने इस उदारता के वजह और कई तरह के सोंच की बड़ी वजह से कुछ न कर पाते। यह  कहानी  किसी को हिदायत नहीं देती पर इतना तो ज़रूर कर देती है की लोग यह सोंचते है की कहीं न कहीं यह बात सही है" और यही मेरे लिए काफी है, किस तरह से हमें खुद को बदलना है, सुधारना है. बस इतना समझ जाओ की हम अपनी भावुकता अपने हर उन चीज़ों में जहां उसको बचाये रखनी है, में दखल कर देते हैं और जब हमारा काम नहीं बनता तो दोष भी खुद को दे डालते हैं. आंकड़े भी मौजूद हैं. आनेवाले क्षणिक भर की ख़ुशी के लिए हम थोड़ा सा उधार ले लेते हैं और सोंचते है की थोड़े थोड़े कर के इसे पूरी कर देंगे सूद के साथ लेकिन जब चुकाने का पहला वक्त आता हैं तो समझ आती हैं, अरे हमारे निश्चित आय से एक टुकड़ा उस उधार को चुकाने में जानेवाला है और फिर क्या चले आते हैं मायूसी के अँधेरे मैं जहां गम के...